3 यॉर्कर तकनीकें तुलना: सटीक गेंद
क्रिकेट में यॉर्कर डालने का सबसे भरोसेमंद तरीका है गेंद को बल्लेबाज के जूतों के पास, ऑफ स्टंप और मिडिल स्टंप की लाइन में टप्पा दिलाना। यह तकनीक तेज गेंदबाज, सीमित ओवरों का विशेषज्ञ और शुरुआती खिलाड़ी....
3 यॉर्कर तकनीकें तुलना: सटीक गेंद
क्रिकेट में यॉर्कर डालने का सबसे भरोसेमंद तरीका है गेंद को बल्लेबाज के जूतों के पास, ऑफ स्टंप और मिडिल स्टंप की लाइन में टप्पा दिलाना। यह तकनीक तेज गेंदबाज, सीमित ओवरों का विशेषज्ञ और शुरुआती खिलाड़ी सभी अपना सकते हैं, चाहे अभ्यास नेट में हो या भारत के घरेलू मैदानों पर। सही यॉर्कर के लिए रन-अप की लय, गेंद पकड़ने की स्थिरता, अंतिम कदम पर शरीर का संतुलन और रिलीज के समय कलाई की दिशा निर्णायक हैं। यॉर्कर को केवल तेज गेंद समझना गलती है; कम गति की सटीक गेंद भी जसप्रीत बुमराह और वसीम अकरम जैसे गेंदबाजों की तरह बल्लेबाज को रोक सकती है। अभ्यास में 6 गेंदों का एक लक्ष्य-सेट बनाइए, हर गेंद के बाद टप्पे का स्थान नोट कीजिए और पहले सटीकता, फिर गति बढ़ाइए। यही क्रिकेट चर्चा की सीधी सलाह है।

मिथक 1: क्या तेज गेंदबाजी के बिना यॉर्कर नहीं डाली जा सकती — गलत
यॉर्कर के लिए असली जरूरत केवल 140 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार नहीं, बल्कि सही लंबाई और दिशा है। एक मध्यम गति का गेंदबाज भी बल्लेबाज के पैर के पास गेंद गिराकर प्रभावी यॉर्कर डाल सकता है, जबकि तेज गेंदबाज की 145 किलोमीटर प्रति घंटा वाली गेंद अगर फुल टॉस बन जाए तो वही मौका दे सकती है।
यॉर्कर का लक्ष्य बल्लेबाज के क्रीज में खड़े होने के तरीके के अनुसार बदलता है। दाएं हाथ के बल्लेबाज के खिलाफ ऑफ स्टंप के नीचे का क्षेत्र, मिडिल स्टंप की जड़ और पैरों के पास का हिस्सा अलग-अलग विकल्प हैं। बाएं हाथ के बल्लेबाज के सामने एंगल बदलने से गेंद लेग स्टंप या ऑफ स्टंप की जड़ पर रखी जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के खेल नियमों में यॉर्कर के लिए कोई अलग कानूनी श्रेणी नहीं है; यह गेंद की लंबाई और बल्लेबाज की स्थिति से पहचानी जाती है।
पहले रन-अप को छोटा और नियंत्रित रखें। फिर तीन चीजों पर ध्यान दें:
- अंतिम चार कदमों में गति अचानक न बदलें।
- गेंद छोड़ते समय सिर लक्ष्य की दिशा में स्थिर रखें।
- फ्रंट फुट के आगे लगभग 1 से 2 मीटर का टप्पा क्षेत्र चुनें।
यॉर्कर की उपयोगिता नई गेंद और पुरानी गेंद दोनों में अलग हो सकती है। नई कूकाबूरा गेंद सीम के कारण हल्का विचलन दे सकती है, जबकि पुरानी गेंद रिवर्स स्विंग के साथ अधिक खतरनाक बन सकती है। इसलिए [तेज गेंदबाजी की बुनियादी तकनीक] का अभ्यास यॉर्कर प्रशिक्षण से पहले करना उपयोगी रहेगा।
क्रिकेट चर्चा पर तकनीकी अभ्यास को आसान चरणों में देखना चाहते हैं? नीचे से आगे बढ़ें।
मिथक 2: क्या केवल पैर की उंगलियों पर निशाना लगाना सही है — आधा सच
पैर की उंगलियों के पास यॉर्कर डालना प्रभावी है, लेकिन हर गेंद के लिए वही लक्ष्य चुनना सही नहीं है। बल्लेबाज का स्टांस, क्रीज से दूरी, बल्ले का कोण और मैदान की सीमा-रेखा तय करते हैं कि गेंद जूते के सामने, स्टंप की जड़ पर या वाइड यॉर्कर क्षेत्र में रखनी चाहिए।
सटीक लक्ष्य चुनने के लिए बल्लेबाज की प्रतिक्रिया पढ़िए। अगर रोहित शर्मा जैसा फ्रंट-फुट बल्लेबाज आगे निकलकर खेलता है, तो क्रीज के भीतर थोड़ा पीछे यॉर्कर डालने से उसका बल्ला नीचे लाने का समय घट सकता है। अगर विराट कोहली जैसा बल्लेबाज ऑफ साइड में जगह बनाता है, तो वाइड यॉर्कर उसकी पहुंच से बाहर गेंद रखने का विकल्प बनती है। यह तुलना किसी खिलाड़ी की स्थायी कमजोरी नहीं बताती; यह केवल शॉट चयन और गेंद की लाइन के संबंध को समझाती है।
वाइड यॉर्कर में गेंद को वाइड लाइन के बहुत करीब रखना पड़ता है। टी20 क्रिकेट में यह सीमा रणनीतिक है, क्योंकि एक छोटी गलती अतिरिक्त रन दे सकती है। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के नियमों के अनुसार वाइड का निर्णय बल्लेबाज की सामान्य पहुंच और गेंद की स्थिति पर निर्भर करता है, इसलिए निशाना केवल सफेद लाइन देखकर न लगाएं।
अभ्यास के लिए क्रीज के सामने तीन छोटे लक्ष्य बनाइए:
- मिडिल स्टंप की जड़: विकेट लेने वाली यॉर्कर।
- बल्लेबाज के जूते के सामने: ब्लॉकहोल यॉर्कर।
- ऑफ स्टंप से बाहर सुरक्षित क्षेत्र: वाइड यॉर्कर।
पहले 12 गेंदों में केवल एक लक्ष्य रखें। उसके बाद लक्ष्य बदलें, लेकिन रन-अप और रिलीज की लय समान रखें। यही तरीका बताता है कि गलती लक्ष्य की थी या तकनीक की।

मिथक 3: क्या कलाई मोड़ने से हर यॉर्कर स्विंग करेगी — बिल्कुल गलत
कलाई को जबरन मोड़ना स्विंग की गारंटी नहीं देता; इससे गेंद की दिशा बिगड़ सकती है, सीम टेढ़ी हो सकती है और कंधे पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। स्विंग के लिए गेंद की चमक, सीम की स्थिति, रिलीज कोण, हवा और पिच की दशाएं एक साथ प्रभाव डालती हैं।
सीधी यॉर्कर के लिए गेंद को पहली दो उंगलियों और अंगूठे के बीच आराम से पकड़ें। सीम को लक्ष्य की दिशा में सीधा रखने की कोशिश करें, लेकिन पकड़ इतनी कसी हुई न हो कि रिलीज के समय कलाई जाम हो जाए। अंतिम कदम पर फ्रंट आर्म को लक्ष्य की ओर खींचना और सिर को आगे गिरने से रोकना नियंत्रण बढ़ाता है। शाहीन शाह अफरीदी की इनस्विंगिंग यॉर्कर और जसप्रीत बुमराह की कम ऊंचाई वाली रिलीज अलग तकनीकी मॉडल हैं; दोनों को नकल करने के बजाय अपने शरीर के अनुसार अभ्यास करना चाहिए।
एक उपयोगी जानकारी यह है कि यॉर्कर में गेंद का टप्पा देखने के लिए बल्लेबाज की आंखों को नहीं, अपने रिलीज बिंदु को प्रशिक्षित करना होता है। गेंद छोड़ने के बाद सिर घूमने लगे तो शरीर लक्ष्य से बाहर जा रहा है। गेंदबाजी कोच अक्सर वीडियो में तीन फ्रेम देखते हैं: फ्रंट फुट का उतरना, गेंद का हाथ से निकलना और पहला टप्पा। मोबाइल कैमरे से 60 फ्रेम प्रति सेकंड पर रिकॉर्डिंग इस अंतर को सामान्य आंख से बेहतर दिखा सकती है।
स्विंग और सीम की बारीकियों के लिए [स्विंग गेंदबाजी की उन्नत रणनीति] देखना उपयोगी है। पहले सीधी यॉर्कर स्थिर कीजिए, फिर अंदर आती या बाहर जाती गेंद जोड़िए। उल्टा करने पर अभ्यास जल्दी बिखरता है (झंझट किसे चाहिए)।
वास्तव में क्या काम करता है: रन-अप से रिलीज तक
यॉर्कर सीखने का व्यावहारिक क्रम है: पहले लक्ष्य तय करना, फिर रन-अप को दोहराना, उसके बाद गेंद की पकड़ और अंत में गति बढ़ाना। अधिकांश शुरुआती खिलाड़ी उल्टा करते हैं—वे पूरी ताकत से गेंद डालते हैं और बाद में सोचते हैं कि गेंद कहां गिरी। सटीकता का आधार शरीर की दोहराने योग्य स्थिति है, न कि हर गेंद पर अतिरिक्त प्रयास।
पहले चरण में पिच पर 30 सेंटीमीटर चौड़ा लक्ष्य क्षेत्र बनाएं। छह गेंदों के सेट में कितनी गेंदें उस क्षेत्र में गिरीं, लिखें। 10 में से कम से कम 6 गेंदें लक्ष्य में आने लगें तो ही रन-अप की गति बढ़ाएं। यह 60 प्रतिशत का अभ्यास मानक किसी आधिकारिक नियम का हिस्सा नहीं है, बल्कि प्रशिक्षण में प्रगति मापने का व्यावहारिक तरीका है। अगर गति बढ़ाते ही सटीकता 40 प्रतिशत से नीचे चली जाए, तो पुरानी गति पर लौटना बेहतर है।
तकनीक को इस क्रम में रखें:
- रन-अप: कदमों की संख्या स्थिर रखें; शुरुआती अभ्यास में 8 से 12 कदम पर्याप्त हैं।
- लोड-अप: आखिरी दो कदमों में शरीर को सीधा रखें और कंधे लक्ष्य की ओर रखें।
- फ्रंट फुट: पैर लक्ष्य से बहुत बाहर न गिरे, वरना कूल्हे खुल जाएंगे।
- रिलीज: गेंद को शरीर के सामने ऊंचे और स्थिर बिंदु से छोड़ें।
- फॉलो-थ्रू: गेंद के पीछे दौड़ें, बगल में गिरने से बचें।
ऑस्ट्रेलिया के कूकाबूरा और इंग्लैंड के ड्यूक गेंदों का व्यवहार अलग महसूस हो सकता है, इसलिए गेंद बदलते समय लक्ष्य क्षेत्र भी दोबारा जांचें। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद का गेंदबाजी नियम संग्रह कानूनी डिलीवरी, नो-बॉल और फ्रंट-फुट स्थिति समझने के लिए विश्वसनीय संदर्भ है। ध्यान रहे, नो-बॉल होने पर शानदार यॉर्कर भी बेकार हो जाती है।
अब अभ्यास को मैच जैसी स्थिति में बदलने का समय है। यह चरण तभी शुरू करें जब 6 में से 4 गेंदें नियमित रूप से लक्ष्य के पास गिरने लगें।
मैच में यॉर्कर कब डालें?
डेथ ओवरों में यॉर्कर का उद्देश्य केवल विकेट लेना नहीं, बल्कि बल्लेबाज को लंबे शॉट के लिए पर्याप्त ऊंचाई और लंबाई न देना है। 16वें से 20वें ओवर के बीच कप्तान की फील्ड, बल्लेबाज की ताकत और गेंद की हालत के अनुसार सीधी यॉर्कर, वाइड यॉर्कर और धीमी फुल गेंद का मिश्रण अधिक उपयोगी हो सकता है।
अगर बल्लेबाज लॉन्ग ऑन और लॉन्ग ऑफ के ऊपर मारने के लिए क्रीज से बाहर आता है, तो पैर के पास तेज यॉर्कर जोखिम घटाती है। लेकिन लगातार छह यॉर्कर डालने की कोशिश भी अनुमानित हो सकती है। एक सामान्य मैच योजना में दो यॉर्कर, एक धीमी गेंद, एक हार्ड लेंथ और फिर बल्लेबाज की प्रतिक्रिया के अनुसार अगली गेंद रखना बेहतर निर्णय हो सकता है। यह कोई स्थायी फार्मूला नहीं; पिच, स्कोर और फील्ड के आधार पर बदलाव जरूरी है।
टी20 लीगों में मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स और लखनऊ सुपर जायंट्स जैसी टीमों के डेथ-ओवर प्लान में गेंद की गति के साथ फील्डिंग कोण भी महत्वपूर्ण होते हैं। यॉर्कर मिस होने पर गेंद फुल टॉस या लो फुल टॉस बनती है, इसलिए बैकअप फील्डर डीप मिडविकेट, लॉन्ग ऑन और थर्ड मैन पर तैयार रखना चाहिए। आईपीएल की आधिकारिक वेबसाइट पर स्कोरकार्ड और ओवर-वार संदर्भ से मैच रणनीति समझी जा सकती है।
ध्यान देने योग्य दो कम चर्चित बातें हैं। पहली, बल्लेबाज क्रीज के बहुत पीछे खड़ा हो तो वही रिलीज यॉर्कर की जगह लो फुल टॉस बन सकती है। दूसरी, गीली गेंद में सीम पकड़ कमजोर होने से सीधी यॉर्कर अधिक भरोसेमंद हो सकती है, जबकि स्विंग पर निर्भर गेंद का नियंत्रण घट सकता है।

क्या नजरअंदाज करना चाहिए?
सबसे पहले सोशल मीडिया के उन छोटे वीडियो को नजरअंदाज करें जो हर गेंदबाज के लिए एक ही रिलीज बिंदु या कलाई कोण को सार्वभौमिक समाधान बताते हैं। गेंदबाज की ऊंचाई, बांह का कोण, रन-अप, कंधे की गतिशीलता और पिच की लंबाई अलग होती है। जसप्रीत बुमराह की छोटी रन-अप वाली यॉर्कर को किसी लंबे कद के जूनियर गेंदबाज पर हूबहू लागू करना चोट और असंगति दोनों पैदा कर सकता है।
दूसरा, हर मिस को केवल “ज्यादा ताकत चाहिए” कहकर सुधारना गलत है। गेंद अगर बल्लेबाज के कमर के पास फुल टॉस हो रही है, तो समस्या अक्सर रिलीज देर से होने की होती है। अगर गेंद लेग साइड में जा रही है, तो फ्रंट फुट, कूल्हे और कंधे एक ही दिशा में नहीं आ रहे हो सकते हैं। वीडियो में टप्पे के साथ गेंद छोड़ने वाले हाथ और फ्रंट फुट की लाइन भी देखें।
तीसरा, थकान को नजरअंदाज न करें। तेज गेंदबाजों के लिए यॉर्कर अभ्यास में 30 से 36 उच्च-तीव्रता वाली गेंदें पर्याप्त प्रशिक्षण ब्लॉक हो सकती हैं; इसके बाद तकनीक बिगड़ने लगे तो आराम करना ज्यादा समझदार है। यह संख्या खिलाड़ी की उम्र, फिटनेस और कोचिंग योजना के अनुसार बदलेगी। दर्द होने पर अभ्यास रोकें और योग्य फिजियोथेरेपिस्ट या कोच से सलाह लें।
चौथा, केवल विकेट को सफलता का पैमाना न बनाएं। नेट अभ्यास में सही टप्पा, नो-बॉल से बचाव, बल्लेबाज के शॉट को रोकना और लगातार दोहराव अधिक महत्वपूर्ण संकेतक हैं। क्रिकेट चर्चा की साफ राय है: शानदार दिखने वाली एक यॉर्कर से बेहतर है छह नियंत्रित गेंदों का सेट।
इन गलतियों को नोट करने के लिए हर सत्र के बाद एक छोटा रिकॉर्ड रखें:
- कितनी गेंदें लक्ष्य क्षेत्र में गिरीं?
- कितनी गेंदें फुल टॉस बनीं?
- कितनी गेंदें वाइड या लेग साइड में गईं?
- थकान किस गेंद संख्या के बाद दिखी?
- बल्लेबाज ने किस गेंद पर शॉट खेलने की कोशिश की?
अपनी प्रगति को आंकड़ों में देखना भावनात्मक अनुमान से बेहतर है। यॉर्कर कोई जादुई गेंद नहीं; यह दोहराव, निर्णय और शरीर के नियंत्रण का परिणाम है।
यॉर्कर सीखने की 14-दिन की अभ्यास योजना
पहले तीन दिन बिना बल्लेबाज के लक्ष्य अभ्यास करें। 18 गेंदों के तीन सेट में केवल मिडिल-स्टंप यॉर्कर डालें और प्रत्येक सेट के बीच दो मिनट आराम करें। चौथे से छठे दिन उसी रन-अप से ऑफ-स्टंप और लेग-स्टंप लक्ष्य जोड़ें। सातवें दिन वीडियो देखकर फ्रंट फुट और रिलीज बिंदु की तुलना करें; उस दिन तेज गति के बजाय तकनीकी सुधार पर ध्यान दें।
आठवें से दसवें दिन बल्लेबाज या कोच को क्रीज पर खड़ा करें। बल्लेबाज को कभी क्रीज से बाहर, कभी पीछे और कभी वाइड एंगल में खड़ा कराकर लक्ष्य बदलें। हर स्थिति में छह गेंद डालें और देखें कि गेंद का टप्पा कैसे बदलता है। ग्यारहवें दिन वाइड यॉर्कर का अभ्यास करें, लेकिन वाइड लाइन के बेहद करीब जाने से पहले नियंत्रण सुनिश्चित करें।
अंतिम तीन दिनों में मैच सिमुलेशन करें:
- 16वें ओवर की स्थिति में छह गेंद डालें।
- फील्ड के अनुसार सीधी और वाइड यॉर्कर चुनें।
- एक मिस के बाद तुरंत वही गलती न दोहराएं।
- स्कोर, बल्लेबाज और गेंद की हालत को निर्णय में शामिल करें।
- सत्र के बाद 10 में से सटीकता अंक दें।
अगर खिलाड़ी 14 दिनों में स्थिर परिणाम न पाए, तो योजना असफल नहीं मानी जानी चाहिए। यॉर्कर में कलाई, कंधे और धड़ का समन्वय समय लेता है। उम्र कम हो तो भारी गति प्रशिक्षण के बजाय हल्की गेंद, सीमित ओवर और प्रशिक्षित कोच की निगरानी प्राथमिकता होनी चाहिए। [शुरुआती क्रिकेट प्रशिक्षण गाइड] से बुनियादी अभ्यास क्रम को और व्यवस्थित किया जा सकता है।
अब आपके पास तकनीक, लक्ष्य, मैच निर्णय और सुधार का तरीका—चारों मौजूद हैं।
निष्कर्ष: सटीक यॉर्कर का सरल सूत्र
क्रिकेट में यॉर्कर डालने के लिए पहले अपने रन-अप और रिलीज बिंदु को दोहराने योग्य बनाइए, फिर बल्लेबाज के स्टांस के अनुसार लक्ष्य चुनिए और अंत में गति तथा स्विंग जोड़िए। पैरों के पास गेंद डालना उपयोगी है, लेकिन स्टंप की जड़ और वाइड यॉर्कर भी परिस्थिति के अनुसार उतने ही प्रभावी विकल्प हैं। कलाई को जबरन मोड़ने, हर गेंद पर अधिक ताकत लगाने और सोशल मीडिया की एकरूप सलाह पर निर्भर रहने से बचें। 6 गेंदों के सेट, वीडियो विश्लेषण और 60 प्रतिशत से ऊपर लक्ष्य-सटीकता जैसे व्यावहारिक संकेतक प्रगति को साफ दिखाते हैं। मैच में यॉर्कर का मूल्य विकेट से आगे जाकर रन रोकने, शॉट सीमित करने और बल्लेबाज पर दबाव बनाने में है। नियमित अभ्यास कीजिए, दर्द को अनदेखा मत कीजिए और अपनी तकनीक को जसप्रीत बुमराह, शाहीन शाह अफरीदी या वसीम अकरम की नकल के बजाय अपने शरीर के अनुसार विकसित कीजिए।
इस अभ्यास को अपनी अगली नेट सत्र योजना में शामिल करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: यॉर्कर क्या होती है?
उत्तर: यॉर्कर वह गेंद है जो बल्लेबाज के पैरों के पास या स्टंप की जड़ के बेहद करीब टप्पा खाती है। इसका उद्देश्य बल्लेबाज को बल्ला नीचे लाने के लिए बहुत कम समय देना होता है। सीधी यॉर्कर, वाइड यॉर्कर और अंदर आती यॉर्कर इसके सामान्य रूप हैं। इसकी सफलता केवल गति पर नहीं, बल्कि लंबाई, दिशा और बल्लेबाज की स्थिति पर निर्भर करती है।
प्रश्न: क्रिकेट में यॉर्कर कैसे डालें?
उत्तर: स्थिर रन-अप, आरामदायक गेंद पकड़, लक्ष्य की ओर सीधा सिर और सामने स्थिर रिलीज बिंदु से शुरुआत करें। पिच पर 30 सेंटीमीटर का लक्ष्य क्षेत्र बनाकर छह गेंदों के सेट में अभ्यास करें। पहले बिना पूरी ताकत के सटीकता हासिल करें, फिर गति बढ़ाएं। गेंद फुल टॉस बन रही हो तो रिलीज देर से हो रही है; वीडियो रिकॉर्डिंग से यह गलती पहचानना आसान होता है।
प्रश्न: यॉर्कर और फुल टॉस में क्या अंतर है?
उत्तर: यॉर्कर बल्लेबाज के पैरों के पास टप्पा खाती है, जबकि फुल टॉस बिना टप्पे के बल्लेबाज तक पहुंचती है। यॉर्कर को खेलना कठिन होता है, लेकिन अधिक लंबी गेंद देर से रिलीज होने पर कमर या उससे ऊपर की फुल टॉस बन सकती है। कमर से ऊपर की फुल टॉस नो-बॉल हो सकती है, इसलिए फ्रंट फुट और रिलीज ऊंचाई पर विशेष ध्यान दें।
प्रश्न: यॉर्कर सही जगह पर क्यों नहीं गिरती?
उत्तर: यॉर्कर अक्सर देर से रिलीज, अस्थिर रन-अप, खुलते हुए कंधे या लक्ष्य से बाहर गिरते फ्रंट फुट के कारण गलत जगह जाती है। अगर गेंद फुल टॉस है तो रिलीज जल्दी करने का अभ्यास करें; अगर वह लेग साइड में जा रही है तो शरीर की दिशा जांचें। छह गेंदों के सेट का वीडियो रिकॉर्ड करें और केवल पहले टप्पे पर नहीं, गेंद छोड़ने की स्थिति पर भी ध्यान दें।
प्रश्न: क्या शुरुआती खिलाड़ी यॉर्कर सीख सकते हैं?
उत्तर: शुरुआती खिलाड़ी कम गति और छोटे रन-अप से यॉर्कर सीख सकते हैं। पहले 8 से 12 कदमों का नियंत्रित रन-अप रखें और 18 से 24 गेंदों के हल्के अभ्यास सत्र करें। तेज गति से पहले लक्ष्य-सटीकता, संतुलन और सुरक्षित फॉलो-थ्रू विकसित करें। कंधे या पीठ में दर्द होने पर अभ्यास रोककर योग्य कोच या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें।
प्रश्न: सीधी यॉर्कर और वाइड यॉर्कर में कौन बेहतर है?
उत्तर: दोनों का उपयोग अलग परिस्थितियों में होता है, इसलिए कोई एक हमेशा बेहतर नहीं है। सीधी यॉर्कर स्टंप और पैरों को निशाना बनाती है, जबकि वाइड यॉर्कर बल्लेबाज की पहुंच और बड़े शॉट को सीमित करने का प्रयास करती है। वाइड यॉर्कर में लाइन की छोटी गलती अतिरिक्त रन दे सकती है, इसलिए पहले सीधी यॉर्कर पर नियंत्रण बनाना अधिक सुरक्षित है।
प्रश्न: यॉर्कर डालने में कितनी गेंदों का अभ्यास करना चाहिए?
उत्तर: शुरुआती प्रशिक्षण में 18 से 36 गुणवत्तापूर्ण गेंदों के दो या तीन सेट पर्याप्त हो सकते हैं। हर छह गेंदों के बाद लक्ष्य-सटीकता, फुल टॉस और वाइड की संख्या लिखें। थकान से तकनीक बिगड़ने लगे तो संख्या बढ़ाने के बजाय आराम करें। 10 में से 6 गेंदें लक्ष्य क्षेत्र में आने लगें, तब धीरे-धीरे गति और मैच जैसी परिस्थितियां जोड़ें।
पढ़ने के लिए धन्यवाद।
क्रिकेट चर्चा
उच्च-दांव संपादकीय · प्रीमियम अंतर्दृष्टि